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एरोमा थेरेपी के फायदे | Benefits of Aromatherapy in Hindi

एरोमा थेरेपी के फायदे | Benefits of Aromatherapy in Hindi…

“एरोमा थेरेपी (Aroma Therapy)” यानी खुशबु की चिकित्सा। इसमें खुशबु के माध्यम से बीमारियों का इलाज किया जाता है। इसके प्रयोग से शरीर में किसी भी प्रकार की एलर्जी नहीं होती तथा ये शरीर को बिना नुक्सान पहुँचाये बीमारियों से बचाता है। इस थेरेपी में खुशबु के द्वारा हमारे दिमाग (Brain), स्नायुतंत्र (Nerve Fibers) आदि को फायदा पहुँचता है। इसमें खुशबू वाली चीज़ो का इस्तेमाल किया जाता है – जैसे जड़, तना, पेड़, पौधे, पत्तिया. फल-फूल कुछ सब्ज़िया कुछ मसाले आदि।

एरोमा थेरेपी (Aroma Therapy) प्राकृतिक तेलों के उपयोग से अलग अलग तरह की बीमारियों के उपचार की एक लाभदायक चिकित्सा पद्धति है।

यह शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं। :-

तनाव और थकान को दूर करने तथा दिमाग की कार्यविधि को बढ़ाने के लिए ये विधि अत्यंत कारगर उपचार है। एरोमा थेरेपी इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है उपचार का ये तरीका वर्षो से प्रयोग में आता रहा है ।

त्वचा संबंधी समस्याओं में एरोमा थैरेपी से मिलती है राहत :-

तन और मन रहते है स्वस्थ :-

एरोमा थैरेपी त्वचा व बालों के साथ मन को भी स्वस्थ रखती है। थैरेपी में ऐसेंशियल ऑयल का प्रयोग किया जाता है जो फूल-पत्तियों व पौधों से बनाया जाता है। यह थैरेपी दिमाग की कार्यविधि को बढ़ाती है। त्वचा की प्रकृति के अनुसार थैरेपी दी जाती है कील-मुहासों की समस्या में अलग तरीके से थैरेपी दी जाती है।

रूखी व ऑयली त्वचा :-

रूखी ( ड्राय ) त्वचा के लिए जिरेनियम, रोज, चंदन, नरोली, पचौली कैमोमायिल तेल की थैरेपी देते है। इससे त्वचा का रूखापन खत्म होता है। रक्त संचार बढ़ता है। त्वचा स्वस्थ व चमकदार बनती है। इसके अलावा ऑयली त्वचा के लिए लेमन, बरगामोट, लैवेंडर, मिंट, बेसिल के ऑयल से थैरेपी देते हैं। इससे त्वचा की तैलीय सतह साफ हो जाती है। स्किन की चमक बढ़ती है। दाने भी कम होते हैं।

इसलिए बढ़ती है चमक :-

ऐसे लोग जिनकी त्वचा का टी-जोन तेलीय और बाकी रुखा होता है। उन्हें रोज जिरेनियम, लैवेंडर, जैस्मिन ऑयल की थैरेपी देते हैं। इसके अलावा मैच्योर त्वचा यानी 40 की उम्र के बाद स्किन में लचीलापन कम हो जाता है तथा झुरियां आने लगती है। इसके लिए चंदन, एवोकाडो, गाजर के बीज, गुलाब के तेल की थेरेपी देते हैं। इससे त्वचा की लाइने घटती हैं।

रासायनिक तत्वों से बचे, होते है नुक्सानदायक :-

चमकती त्वचा के लिए रासायनिक तत्वों से युक्त उत्पाद तुरंत निखार तो लाते हैं, पर यह कुछ समय के बाद त्वचा की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। त्वचा की रौनक चली जाती है। इसलिए प्राकृतिक चीजों का प्रयोग करें।

कील-मुहांसों से मिलती है राहत :-

कील-मुंहासे के लिए बेसिल, लेमन ग्रास, कमोमाइल, हल्दी, नीम, पेपरमिंट के तेल से थैरेपी देते हैं। इससे कील-मुहांसों में आराम मिलता है। जिनकी त्वचा सेंसेटिव होती है, उन्हें मेनडारिन, लैवेंडर, जैस्मिन, चंदन के तेल की थैरेपी से आराम मिलता है।

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