तन मन साधे योग ...

What is benefits of yoga योगा करने के फायदे और नुकसान

योग हाई बल्ड प्रेशर, आर्थराईटिस अस्थमा में कारगर है । गलत तरीके से करने के कारण इसके अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिलते हैं। योग संस्कृत शब्द के युज से बना है । इसका अर्थ है जुड़ना। योग मानसिक शारीरिक संतुलन बनाकर आंतरिक व बाहरी रोगों को दूर करता है। पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारु करने में यह सहायक है। जानते हैं कि योग कैसे असर करता है।

विषैले तत्व निकालता :-

शरीर में मौजूद सातों चक्र अलग-अलग हार्मोन स्रावित करते हैं। योग से हर चक्र का शुद्धिकरण होता है। इससे संबंधित अंग से जुड़े रोग दूर होते हैं। थाइरॉयड, पियूष, मेलाटोनिन जैसे मुख्य हार्मोन सही तरीके से स्रावित होते हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है। दाहिनी नासिका से सांस लेने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता हैं।बायीं से सांस लेने से मस्तिष्क की गतिविधि बढ़ जाती हैं।

इससे ब्लड प्रेशर भी सही रहता हैं। कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों, जोड़ो व स्नायुतंत्र से विषैले तत्व लेक्टिक व यूरिक एसिड के रूप जमा होते हैं। योग आसन से इनमें खींचाव से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। इससे शरीर में लचीलापन बढ़ता हैं। इसके लिए जरूरी हैं कि योग विशेषज्ञ के अनुसार नियमित सही मुद्रा व तरीके से योग का अभ्यास किया जाए ।

युवा:-

युवाओं की खराब सेहत के पीछे बिगड़ती जीवनशैली व गलत खानपान प्रमुख वजह हैं। तनाव, अवसाद से युवा ग्रसित हो रहे हैं।

01. पश्चिमोत्तासन से शरीर का लचीलापन बढ़ता :-

पैरों को सीधा कर सामने जमीन पर फैलाए। स्वांस लेते हुए दोनों हाथों को आगे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों से अंगूठे पकड़े और सिर को घुटनों से लगाएं। इससे एसिडिटी, दर्द, मरोड़ अपच की समस्या दूर होती है। जिसका शरीर लचीला न हो वे तेजी में इसे न करें।

02. अर्द्ध मत्सेन्द्रासन किडनी के लिए फायदेमंद :-

दाएं पैर के पंजे को कूल्हे के पास लाकर बाएं पैर के पंजे को दाएं घुटने के पीछे रखे। गर्दन को बाएं पैर की तरह क्षमता अनुसार पीछे की ओर ले जाएं ।फिर दाएं हाथ से बाएं पैर के पंजे को पकड़ ले। फेफड़े किडनी व पाचन के लिए फायदेमंद है। गर्दन और कमर दर्द में यह आसन न करें।

03. हलासन से भूख बढ़ती व मांसपेशियां मजबूत :-

शरीर की स्थिति हल की बनने के कारण इसे हलासन करते हैं। लेटकर हाथों को जमीन से टिकाएं। पैरों को उठाते हुए सिर के पीछे तक ले जाए ।ऐसा करने पर भूख बढ़ती हैं। पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है। अधिक वजन, पेट और कमरदर्द मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति बिना विशेषज्ञ सलाह से न करें

बच्चों:-

10 वर्ष की उम्र के बाद यह योगासन शुरू करें। बच्चों में एकाग्रता, रोग प्रतिरोधक क्षमता व लंबाई बढ़ाने में कारगर है।

01. वज्रासन व पद्मासन में एकाग्रता बढ़ती :-

ऐसे करें :- इसमें दोनों पैरों को पीछे मोड़कर पंजों पर बैठकर जांघों पर हाथ रखते हैं। साथ ही कमर सीधी व आंख बंद कर ध्यान लगाते हैं ।

तो अर्द्धपद्मासन करें:- सुखासन में बैठकर एक - दूसरे पैर की जांग पर रखते हैं। ऐसा न कर पाए तो अर्द्धपद्मासन की मुद्रा में भी बैठ सकते हैं।

02. तितली व ताड़ासन से शरीर बनता मजबूत :-

तितली आसन : - जमीन पर बैठकर पैरों के तलवों को जोड़ें घुटनों को तितली के पंखों की तरह ऊपर - नीचे करें ऐसा 3-5 मिनट कर सकते है।

ताड़ासन : पैरों के पंजों पर खड़े होकर हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। साथ ही, पूरे शरीर को ऊपर की ओर लेजाते हुए कुछ देर तक सांस रोके।

03. नियमित अभ्यास से दिमाग तेज होता है :-

नाड़ी शोधन : दायीं नासिका से सांस लेकर बायीं नासिका से निकाले ।

भ्रमरी :- अंगूठे से कान बंद करें। तर्जनी से आंख, मध्यमा से नाक के पास, अनामिका को उपर वाले होठ व कनिष्ठा अंगुली निचले होंठ के नीचे रखे ।नाक से सांस अंदर लेकर भंवरे की तरह गुंजन करते हुए निकाले।

इन बीमारियों में कारगर हैं योगासन :-

01. सर्वाइकल :-

यह महिलाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। अंगुलियों के जोड़ों व कलाई को भी मजबूत करता है।

गोमुखासन :-
पहले वज्रासन मुद्रा में बैठ जाएं। पद्मासन या सुखासन में बैठकर करें । बाएं हाथ को कमर के पीछे ले जाए। दाएं हाथ को ऊपर की तरफ लेकर बाएं हाथ को पकड़ कर खींचना है। इस दौरान सांसें सामान्य रखें। रीड की हड्डी सीधी रखें। यह अस्थमा अस्मिता में कारगर है। सर्वाइकल स्पांडलिसिस में आराम पहुंचाता है। कंधे को मजबूत करता है। इससे कमजोर हड्डियो वाले लोग और बुजुर्ग न करें।

02. डायबिटीज :-

यह आसन ह्रदय रोगो में भी कारगर है। जांघों व पाचन को मजबूत करता है। इसे करने से पहले स्ट्रैचिंग योग ( सूर्य नमस्कार ) करना चाहिए।

पादहस्तासन :-
पैरों को जोड़कर सीधा खड़ा होना है। स्वांस अंदर लेते हुये दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाए और सांस छोड़ते हुए कमर के नीचे की ओर घुटने मोड़े बिना हथेलियों को पंजे तक लाना है।ऐसा करने से पेट की चर्बी घटती है। पैक्रियाज को इंसुलिन हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है।

03. अस्थमा :-

भुजंगासन, धनुरासन, अर्द्धचंद्रासन, गौमुखासन भी इसमें अत्यंत लाभकारी है।

अर्द्धचक्रासन : -खडें हो दोनों पैरों के बीच 1 फीट का गेप व दोनों हाथ कमर पर हो स्वास लेते हुए पीछे की ओर झुकें। इसे नियमित करने से अस्थमा, कमर दर्द में असरकारी है। पेट की चर्बी घटाता, पाचन शक्ति बढ़ाता है। योगाभ्यास करते समय आंखें खुली होनी चाहिए। इसे हर कोई कर सकता है।

04. हाई ब्लड प्रेशर :-

हाइपो थॉयराइड, अस्थया के मरीज, पेट में कोई चोट लगी है तो बिना चिकित्सक की सलाह से न करें।

भुजंगासन :-
पेट के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को छाती के बगल में रखें। इसके बाद सांस अंदर लेते हुए कमर के ऊपरी भाग को ऊपर की ओर उठाना है। इस अवस्था में 10 सेकंड रुके। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर लाए। ऐसा करने पर पेट में जमा चर्बी घटती है। हाइपर टेंशन नियंत्रित रहता है। इसे हर कोई कर सकता है। इसे करते समय सांस अंदर व बाहर करने का क्रम ध्यान रखना जरूरी है। वजन घटाने में कारगर त्रिकोणासन

घटेगी चर्बी, शरीर बनेगा मजबूत :-

मजबूत शरीर :- नियमित तौर पर इस आसन को करने से गर्दन, पीठ, कमर, जांघ और कंधे मजबूत होते हैं।

घटता है वजन :- पेट की अतिरिक्त चर्बी को घटाकर शरीर लचीला बनता है।

दूर होगा कब्ज :- कब्ज से परेशान है तो त्रिकोणासन किया जा सकता है। इससे पाचन तंत्र बढ़ता है और मजबूत बनता है।

दुरुस्त रहेंग फेफड़े :- इस आसन को नियमित करने से फेफड़े मजबूत होते हैं सांस संबंधी समस्या में राहत मिलती है।

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