कैसे रखें गर्भावस्था में अपना ख्याल? यदि जुड़वां बच्चे है तो

Pregnancy Care - कैसे रखें गर्भावस्था में अपना ख्याल? यदि  जुड़वां बच्चे है तो

गर्भावस्था एक सुखद अनुभव है। परिवार में नए मेहमान के साथ खुशियां भी आती है। लेकिन कई बार इसमें कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। यदि गर्भ में जुड़वा बच्चे हैं तो समस्याएं बढ़ जाती हैं। आज हम बताने जा रहे हैं कि जब गर्भवती को जुड़वा बच्चे की जानकारी मिले तो उसे अपनी और बच्चों की सेहत के मद्देनजर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए - गर्भवती होने पर सबसे पहले अपने डॉक्टर से मिलना और चिकित्सा कराना बहुत महत्वपूर्ण है|

प्रेगनेंसी केयर :-

- गर्भ में जुड़वां बच्चे है तो डबल डाइट ही काफी नहीं, पोस्टिक चीज़ें भी लें!

- 5 फीसदी जेस्टेशनल डायबिटीज में बीपी की आशंका ज्यादा रहती है।

- जुड़वा बच्चों की स्थिति में 500 से 600 अधिक कैलोरी की जरूरत पड़ती है।

- 7-8 घंटे की नींद रात में व दिन में 2 घंटे की नींद जरूर ले

जुड़वां बच्चों में परेशानी : -

जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा 5% और बीपी की आशंका 10% तक बढ़ जाती है। शरीर में खुजली, एनीमिया, ब्लीडिंग, अधिक वजन की समस्या होती है। सर्जरी से डिलीवरी, प्रीमेच्योर डिलीवरी की आशंका बढ़ जाती है। गर्भपात का खतरा भी रहता है। इससे बचने के लिए हर माह अल्ट्रासाउंड, डायबिटीज, बीपी की जांच कराते रहें। खून की कमी के लिए हीमोग्लोबिन टेस्ट कराते रहें।

बाएं करवट ही लेटें :-

बाएं करवट लेटने-सोने से भ्रूण को अधिक पोषक तत्व मिलते हैं। पेट फूलने की समस्या भी कम होती है। बिस्तर से उठते समय जल्दीबाजी करने पर कमर दर्द हो सकता है। जुड़वां बच्चों की स्थिति में प्रसव अस्पताल में ही कराएं। कई बार एक बच्चे की डिलीवरी देरी से होती है। ऐसे में जच्चा-बच्चा को खतरा हो सकता हैं।

खाली पेट व उपवास से बचे :-

सिंगल बेबी में मां को 2000 से 2200 कैलोरी डाइट की जरूरत होती है लेकिन जुड़वां बच्चे की स्थिती में 500-600 कैलोरी अधिक जरूरत होती है। इसका अर्थ यह नहीं अधिक मात्रा में खाएं बल्कि पोष्टिक खाएं । कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, सप्लीमेंट ले। पनीर, दाल, हरी सब्जी, दलिया, गुड-धानी, रसगुल्ला खाएं। पानी खूब पीएं। खाली पेट व्रत उपवास न करें।

बेड रेस्ट केवल डॉक्टरी सलाह पर :-

अगर बच्चेदानी के निचले हिस्से में कमजोरी या भ्रूण को परेशानी है तो ही चिकित्सक बेड रेस्ट की सलाह देते हैं। समस्या नहीं है तो बेड रेस्ट न करें। हेल्दी रहने के लिए जरूरी दैनिक कार्य करें। भारी वजन न उठाएं। पैरों में सूजन है तो देर तक पैर न लटकाएं। ज्यादा बेड रेस्ट से भी प्री मेच्योर डिलीवरी की आशंका रहती है। वजन अधिक बढ़ रहा हो या शरीर में दर्द है तो डॉक्टर को बताएं |

32 वीक के बाद ध्यान दें :-

जुड़वा प्रेगनेंसी में प्री टर्म डिलीवरी की आशंका रहती है। इसलिए 32 वीक के बाद हर सप्ताह डॉक्टर को दिखाएं। यदि कोई समस्या नहीं है तो 40 वीक तक इंतजार किया जा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार :-

इसमे हर माह की अलग अलग डाइट होती है। गर्भवती की पसंद का आहार देते हैं। हल्का खाना खिलाएं। मूंग की दाल, दलिया, दूध, दही, लाल चावल का खीर, आंवले का मुरब्बा, दूध में शतावरी आदि देते है।

गर्भावस्था देखभाल के उपचार (pregnancy care tips) :-

हल्का व्यायाम करें :- आपको इस दौरान हल्का व्यायाम – जैसे योग – नियमित तोर पर करना चाहिए| विशेष रूप से, व्यायाम शरीर का दर्द कम करने में मदद करता हैं|

पोषण पर नज़र रखें :- स्वस्थ सेहत और आरामदेह डिलीवरी के लिए आपको पौष्टिक आहार खाना ज़रूरी है|

गैस्ट्रिक समस्याओं से निपटें :- गर्भावस्था में हो रहे गैस्ट्रिक समस्याएं, जैसे मितली होना (nausea), आपके खाने की इच्छा को मिटा देता हैं|

परिवार का सहारा :- इस दौरान, विशेष रूप से डिलीवरी में, अपने परिवार और जीवन-साथी के सहारे से हिम्मत मिलती है| एक संवेदनशील जीवन-साथी माँ बनने की ख़ुशी को दुगना करता है|

पहले तिमाही में देखभाल :- गर्भवती होने पर सबसे पहले अपने डॉक्टर से मिलना और चिकित्सा कराना बहुत महत्वपूर्ण है|

दुसरे तिमाही में देखभाल :- दुसरे तिमाही में आपके शिशु का विकास मापा जाता है| किरन को जाँच के समय पता चला की इस तिमाही में शिशु का हिलना-डुलना महसूस होने लग जाता है|

तीसरे तिमाही में देखभाल :- डिलीवरी की तारीख करीब आने पर आपके शिशु के पोजीशन पर गौर करा जाएगा| डिलीवरी होने तक शिशु का सिर नीचे और पैर ऊपर की तरफ हो जाना चाहिए|

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